Makechemistryeasy

Q. सहसंयोजक अथवा नेटवर्क ठोस:-

Ans:-
अधात्विक क्रिस्टलीय ठोसों की विस्तृत अनेकरूपता संपूर्ण क्रिस्टल में निकटवर्ती परमाणुओं के मध्य सहसंयोजक बंधों के बनने के कारण होती हैं। इन्हें विशाल अणु भी कहा जाता है। सहसंयोजक बंध प्रबल और दिशात्मक प्रकृति के होते हैं; इसलिए परमाणु अपनी स्थितियों पर अति प्रबलता से संलग्न रहते हैं। एेसे ठोस अति कठोर और भंगुर होते हैं। इनका गलनांक अत्यन्त उच्च होता है और गलन से पूर्व विघटित भी हो सकते हैं। ये विद्युत का संचालन नहीं करते, अतः ये विद्युतरोधी होते हैं। हीरा और सिलिकॉन कार्बाइड एेसे ठोसों के विशिष्ट उदाहरण हैं। ग्रैफाइट भी क्रिस्टलों के इस वर्ग में आता है यद्यपि यह मुलायम और विद्युत चालक है। उसके अपवादात्मक गुण उसकी विशिष्ट संरचना के कारण होते हैं। इसमें कार्बन परमाणु विभिन्न परतों में व्यवस्थित होते हैं और प्रत्येक परमाणु उसी परत के तीन निकटवर्ती परमाणुओं से सहसंयोजक बंधन में होता है। प्रत्येक परमाणु का चौथा संयोजकता इलेक्ट्रॉन अलग परतों के मध्य उपस्थित होता है और यह गमन के लिए मुक्त होता है। यही मुक्त इलेक्ट्रॉन ग्रैफाइट को विद्युत का उत्तम चालक बनाते हैं। विभिन्न परतें एक-दूसरे पर सरक सकती हैं। यह ग्रैफाइट को मुलायम ठोस और उत्तम ठोस-चिकनाई बनाते हैं।